ख़ुशी क्या है.? हम इस शब्द को एक प्रकार की फीलिंग के साथ जोड़ देते है. ख़ुशी अर्थात वह सुख जो हमे निरंतर शक्ति प्रदान करता है. ख़ुशी को सफलता के साथ भी जोड़ा जाता है. इसी में ही सब कुछ है. यदि इन्सान खुश है नही, तो सफलता उसके लिए उतनी मायने नही रखती. आज हम इस पोस्ट में इस बात से पर्दा उठाने की कोशिश करेगे, कि ख़ुशी हमारी कैसे प्राप्त की जा सकती है..

ख़ुशी का अर्थ.?

khush rhane ke trike,

आपको याद है, जब आप छोटे थे, तो क्यों खुश रहते थे.? क्योंकि वंहा प्रतिस्पर्धा नही थी… जैसे जैसे हम बड़े होते गये, हमे प्रतिद्वंदी मिलते गये. और इस जीत हार के खेल में हम खुश रहना ही भूल गये… देखिए ये जीवन एक खेल की तरह है. इसमें जीत भी है, हार भी है, पर यदि हम दोनों ही स्थिति में अपनी ख़ुशी न गवाए तो वो असल में हमारी जीत होगी…

एक बात समजे, ये खेल ही ऐसा है. आप हमेशा ही विजय नही प्राप्त कर सकते है. आप आज जीतोगे, तो जरुर कल आप हार सकते हो… तो इसमें लगातार अपने प्रयास तेज रखने है. हार अधिक समय तक नही मिल सकती, और निरंतर जितना असम्भव है…

अक्सर ज्यादातर व्यक्ति सफल न हो पाने के कारण हताश निराश हो जाते है. जिसके कारण उनकी ख़ुशी भी गयाब हो जाती है… क्योंकि उन्होंने ख़ुशी को सफलता से जोड़ रखा था… ऐसा कतई न करे. सफलता दूसरी तरह की फीलिंग होती है. पर अपनी ख़ुशी वो हमारी निजी प्रोपर्टी है… उसे सफलता से न जोड़े, अन्यथा हम दुखी ही रहेगे…

हम ख़ुशी का अर्थ मान शान, धन दौलत से भी न जोड़े, आपने दो पैसे कमाने वालो को भी बहुत खुश देखा होगा. इसका सीधा सा अर्थ है, हम सब खुश इसलिए है. क्योंकि ख़ुशी हमारी निजी सता है… ये सफलता आदि पर कैसे निर्भर हो सकती है.?

सफलता को खुश रहकर प्राप्त किया जा सकता है… जितना हम खुश रहते है, इतना सफल होगे. कुछ लोग ऐसा मानते है, जितना आप परिपक्व और तनाव में होगे, उतना आप सफल दीखेग. पर ऐसा नही है… ये हमारा भ्रम है… सफलता केवल ख़ुशी के आधार से प्राप्त की जा सकती है.

ख़ुशी क्यों गायब हो जाती है.?

कभी कभी हमारे साथ ऐसा अनुभव होता है, जैसे ख़ुशी है ही नही. सारी ख़ुशी गयाब, इसका कारण क्या है.? एक या तो आप बहुत ज्यादा खुद को स्मार्ट समजते हो. और दुनिया की हर बात से खुद को आंकते हो. अर्थात ये भी गलत वो भी गलत, सभी गलत, तब तो ख़ुशी जाएगी. क्योंकि यंहा कोई परफेक्ट नही है… यदि इस तरह से लोगो को देखेगे. उसने ऐसा किया, उसने ऐसा किया तो ख़ुशी कन्हा रहेगी.?

अर्थात जब हम (क्या ,क्यों, कैसे, कौन) के प्रश्नों में फस पड़ते है, तो ख़ुशी गयाब हो जाती है. हमे बस इन्ही प्रश्नों को अपने जीवन से हटाना है. जो जैसा कर रहा, वो उसका रोल है… अब एक ड्रामा है, उसमे आप एक दुसरे के एक्ट को देख ये कहते है क्या, कि तुम गलत चले हो.. नही,… क्योंकि वो ड्रामा बना हुआ है… और यंहा ये भी ऐसा ही बेहद का खेल है… जिसमे हर एक का अनोखा पार्ट है…

अब चोर चोरी नही करेगा, तो पुलिस का क्या काम…? ये समजने की बात है… ख़ुशी इन्ही शिकायतों से दूर चले जाती है… इसमें सबका पार्ट अलग अलग है… हम अपना पार्ट अच्छे से बजाये, तो हम खुश रह सकते है … जो चल रहा उसे चलने दो, ये मन को मजबूत रखेगे. अन्यथा हर तरह के फसाद में फसे तो ख़ुशी गयाब….

खुश रहने के तरीके…

वैसे तो हर एक की खुश रहने का तरीका अपना अपना होता है. कोई किस बात पर खुश तो कोई किस पर, इसमें जो उनिव्र्स्ल तरीका है, हम केवल उसी पर ही बात करेगे. जिससे हम सदा ही खुश रह सकते है. ये उनिव्र्स्ल तरीका हर प्रकार से हमे खुश रखेगा ही…

देखिए इस संसार में जो कुछ घटित होता है, उसका एक बहुत ही सूक्ष्म कारण होता है… वो हमे समज नही आता… हम पहले तो सोचते है, इसमें कुछ गलत है. पर इस दुनिया का एक एक सीन जो चल रहा है… वो सब किसी न किसी कारण घटित हो रहा है…जो सदा ही कल्याणकारी होती है.,.

इस समज को यदि हमने समज लिया, तो दुखी होने के लिए कुछ रहता ही नही, ये बस समजने का तरीका होना चाइये… बहुत से लोग जिन्दगी भर केवल इसीलिए ही दुखी रहते, किसी ने उनके साथ कुछ किया… कुछ उनके साथ गलत हुआ, वो बात हुए कई साल हो गये, अभी तक वो बात भूले नही. क्यों? क्योंकि वो यही मानते है उनके साथ गलत हुआ…

अभी आपको एक विशलेषण करना है. उस समय के सीन को फिर से देखे, और उस सीन के बारे में ये सोचने का प्रयास करे, वो मेरे लिए अच्छा हुआ था… उससे आपके जीवन में क्या क्या फायदे हुए, उसके बारे में सोचे…. आप समज जायेगे, इस संसार में जो कुछ हो रहा है, वो सब अच्छे के लिए ही हो रहा है… इसको करके दिखिए…

बाकि खुश रहने के लिए हम कुछ भी कर सकते है… वो हमारी निजी सोच है, पर बड़े बड़े दुःख जो हमने अंदर सम्भाल कर रखे है…. सबसे पहले तो हमे उन्हें निकाल फैकना है. तभी हम खुश रह सकते है…

खुश रहा नही जाता!

ख़ुशी रहने से नही, करने से प्राप्त होती है… वैज्ञानिको द्वारा एक शोध में बताया गया, कि यदि हम उदासी के स्थिति में लम्बे सम्स्य तक रहते है. तो हम दुखी फील करते है. खुश रहना अर्थात ख़ुशी को महसूस करना… रोजाना आभार व्यक्त करना, जो आज मिला उसका शुक्रिया करना…

अपने चारो तरफ खुश रहने का वातावरण बनाना, ये मेहनत करनी पडती, अब एक इन्सान खुश कैसे रह सकता है भला, जब तक वो उसके लिए कुछ करे नही… इसके लिए करने का एक उतम तरीका है, विचार को उप्ग्रेड करना. विचार ही ख़ुशी का बीज है.

आपने एक मोबाइल लिया, अब आपको इसमें ख़ुशी क्या दे रही है.? ये सोचना कि आपके पास अभी एक मोबाइल है. इसमें आप न जाने क्या क्या कर सकते.? आप अंदर से बेहद खुश होते. आपको बहुत ही अच्छी चीज़ मिली है. पर वास्तव में क्या मोबाइल आपको ख़ुशी दे रहा, जबकि वो तो बोल भी नही सकता.? असल में आपको ख़ुशी आपके विचार दे रहे है… मान ले आपका मोबाइल एकदम खराब हो गया, तो ख़ुशी गयाब, क्यों? क्योंकि यंहा भी विचार ही आया, कि मोबाइल खराब हो गया…

तो हम खुश रह नही सकते, खुश रहना होता है. इसके लिए ख़ुशी के विचार क्रिएट करे. रोजाना करे. इसको आदत का हिस्सा बनाये. तो आप एक दो महीनों में ही खुशमिजाज बन जायेगे…

देखिए इस संसार में ऐसा कोई व्यक्ति नही, जो खुश रहना नही चाहता है… पर परिस्थितिया हर एक के पास आती ही है… इस वक्त तो ये भी बहुत अधिक आ रही है. ऐसे में खुश रहना उतना आसान नही है. कुछ न कुछ बात जरुर आती है.

उस समय आपको करना कुछ नही, सिर्फ ये करना कि जब भी कुछ प्रोब्लमआये, ये नही कहना ये मेरे साथ क्यों हो रहा.? क्या, क्यों कैसे.? इसमें फसोगे, तो फालतू टेंशन में आ जाते है… इससे अच्छा उसे फुल स्टॉप कर दो(.) बातो को बिंदी लगा दो.. उसमे (?) मत लगायो ये लगी तो टेंशन आई… बिंदी लगी तो बात वोही खत्म… तो ये तरीका लिख के ले लो…

दोस्तों उम्मीद है, आपको जानकारी अच्छी लगी होगी. और ऐसे ही हमे शुभभावना का प्रेम आपसे मिलता रहे… आपको इश्वर खुश रखे,… ॐ शांति…

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