how to focus on mind in work…

मन चंचल बहुत होता है, इसकी चंचलता का कारण इसकी व्यर्थ वृति होती है. इसकी चंचलता केवल व्यर्थता तक सिमित नही रहती, बल्कि इसकी व्यर्थता बाहरी आकर्षण से लेकर अनेक ऐसे आयाम है. जो इसे आकर्षित करती है. मन जब बाहरी चीजों के पीछे भागता है. तो इसकी व्यर्थ वृति को एक रास्ता मिल जाता है. मन हमेशा ही मनोरजन के लिए भागता है. सही भी है, इसे मनोरजन चाइये.

मन यदि खुश नही आनन्दित नही तो जीवन का आनन्द नही आता. इसीलिए इसको हमेशा ही आनन्द की जरूरत रहती है. इसीलिए ये चंचल होता है. ये वंहा जाता है, जन्हा इसे थोडा प्लेजर मिले. पर शयद हम भूल पड़ते है, जिस प्लेजर की तलाश में हम बाहरी खोज में रहते है. वो प्लेजर वास्तव में आनन्द नही है. जो मात्र क्षणिक होता है.

मन क्या है?

मन वास्तव में उर्जा है, ये एक स्थूल मस्तिस्क का प्रकार नही है. ये हमारी आत्मा का एक हिस्सा है . जो सूक्ष्म शक्ति है. ये उर्जा लगातार प्रवहित होती है. मन एक सॉफ्टवेयर की तरह है. जो हमारे संकल्प को विचारो को प्रदर्शित करता है.

मन में उत्पन होने वाले विचार बाहरी और भीतरी दुनिया से उत्पन हुए होते है. जब हम अपने विचारो को अर्थात मन को केवल देखते है. रूककर इसे देखना का अभ्यास डाल देते है. तो हम इसमें उत्पन होने वाले विचार को समज सकते है. और उन विचारो का सोर्स भी समज में हमे आ जाता है.

ये एकाग्रता की पहली सीडी है. ज्यादातर सफलता को एकग्रता से जोड़ा जाता है. ये हमारे जीवन की सबसे बड़ी उप्लब्दी होती है. जब हमारा मन केवल अपने लक्ष्य वाले विचार पर एकाग्र हो जाये. पर उसके अलावा कार्य व्यवहार में भी हम एकाग्र रूप से सारे कार्य कर सके.

मन में उत्पन होने वाले विचार यदि व्यर्थ है, नकरात्मक है. तो इसमें एकाग्रता को हासिल नही किया जा सकता है. एकाग्रता को हासिल करने के लिए हमे अपनी मन को स्थिति की जाँच करनी चाइये. अर्थात दो मिनट जब हम अपने मन को केवल देखते है. ओब्सर्व करते है. और जो जो इसमें विचार उत्पन हो रहे. उन्हें बिना रोके बस देखते है. तो मन पहले तो शांत होता जायेगा… दूसरा मन की व्यर्थता का सोर्स हमे मालूम होगा, और हम अपने विचारो के लिए चेतन हो जायेगे…

मन की स्थिति…

हमें मालूम है, मन की स्थिति का जीवन में कितना अधिक महत्व है. जब मन एकदम शांत एवं स्थिर है. तो कितनी ख़ुशी अंदर में रहती है? वो मन की स्थिति हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है. क्योंकि हमारा मन ही हमारी असली दौलत है. तो इसकी स्थिति बनाना बेहद ही जरूरी हो जाता है.

मन की स्थिति को बनाने के लिए हमे अपने मन को समजाने की जरूरत होती है. ये पहली सीडी है, जैसे यदि मन को कोई चीज़ का एडिक्शन है… तो मन को बड़े प्रेम से उस एडिक्शन की व्यर्थता और नुकसन से मन को अवगत करवाना होता है… मन को आराम आराम से वंहा से निकाले, जबरदस्ती नही करनी चाइये.

जब मन बहार निकल आता है. तो फिर दुबारा उस एडिक्शन को पकड़ना भी नही, अर्थात एक रॉयल संस्कार रखना. जो चीज़ एक बार छोड़ दी, तो गिरी हुई चीज़ दुबारा नही उठाना… इस संस्कार से फिर वो एडिक्शन खत्म हो जायेगा.

मन की स्थिति एक दिन में अच्छी नही बनती. मान ले हमारी स्थिति अभी बहुत डाउन है. हम तनाव में रहते है, हमारे पास अनेक मुश्किलें है. तो यंहा से स्थिति उठाना इसमें वक्त लगेगा. मान ले आपकी उम्र ३० वर्ष है. अब इन वर्षो में आपने कुछ ऐसे कार्य किये, जिससे आपकी मन डाउन होता गया. अब आपको इसे उपर उठाने में अवश्य ही टाइम लगेगा.

मन की स्थिति को उठाना कोई सहज कार्य नही है. ये हमे समजना होगा. हाँ अभ्यास से इसको उठाया जा सकता है. आपको जैसे हमने बताया मन उर्जा है. तो इसकी उर्जा का स्त्रोत है. हमारे संस्कार और व्यवहार, जितना हम सही संस्कार डालते है. और अच्छा व्यवहार रखते है. तो मन की उर्जा बनी रहती है.

परन्तु यदि हम अनेक आदतों के कारण अपनी इस उर्जा को मर्ज कर देते. तो मन दुखी रहने लगता. जब मन एकदम शक्तिशाली होता. तो हमारा व्यवहार भी एकदम परफेक्ट हो जाता. व्यवहार डाउन होने का कारण हमने पकड़ी बाते, दुसरो के संस्कार द्वारा हमने वो संस्कार अपने में धारण किये, परिवार का प्रभाव आदि.

जीवन में परिस्थिति अनेक आती है, अनेक बाते एसी होती है, जिससे हम दुखी हताश परेशान हो जाते. इसीलिए क्योंकि हमने केवल अपने मन का ख्याल नही रखा. ऐसा कौन है, जिसके जीवन में दुःख न हो? सबके जीवन में दुःख होते है.

अब दुःख आदि से निकलने का तरीका केवल एक ही है. मन को शक्तिशाली बनाना. मन कैसे शक्तिशाली बनेगा.? हर कोई अंदर एक कुंठा लेकर बैठा है. कुछ न कुछ बात उसने पकड़ कर रखी होती है. कुछ घर में बात है, तो कुछ बाहरी जीवन में मुश्किलें है. अनेक तरह की बाते. जो उसको निचे गिरा रही है.

ऐसे दुःख एवं अशांति के दौर में हम केवल स्वय को ही ठीक कर सकते है. हमने सिर्फ एक बात सीखी. जो आपको सिखाना चाहते है. “शब्दों में हीलिंग शक्ति होती है. हमारे शब्द बड़े से बड़े घाव को भर सकने की ताकत रखते है” ये बहुत ही सरल शब्द है. यदि इन को ध्यान से देखे, तो इसमें हमे कुछ बड़ा नही दीखता. पर वास्वत में हमारे शब्द जो हम प्रयोग करते है. वो सच में हमारे लिए एक वरदान है.

जैसे घर में कोई टेंशन चली है, तो यदि वंहा हम सही सकरात्मक शब्द का प्रयोग करे. तो वो टेंशन निकल जाएगी. यंहा हम एक वाकया आपको देते है.” में एक शक्तिशाली हूँ, ये मुश्किल को में बड़े ही सहज तरीके से पार करने का सामर्थ्य रखता हूँ”: ऐसे सकारत्मक वर्ड, इनको हम संकल्प

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