how to stop mind from negitive thinking? mind solutions?

मन का कार्य
मन की शक्ति क्या है. मन को कैसे समजे.

हमारा मन एक चेतन शक्ति है, ये शक्ति ऐसे कार्य करती है . जो हमारी समज से बहार होती है. जैसे आपने एक रेअक्टर को देखा होगा. वो कैसे कार्य करता है..? उसमे १ अणु से २ परमाणु, उससे अनेक अनेक उत्पन होते रहते है… मन का कार्य भी ठीक उसी तरह होता है, विचार की गति अति सूक्ष्म है. जो देखी नही जा सकती…

अब यंहा होता ये है, जब हमारा मन कुछ सोचने लग जाता है. तो ये चैन रिएक्शन द्वारा चीजों को इकठा करता है… जैसे एक विचार है, उस विचार की कड़ियाँ आगे से आगे जुडती जाती है… कभी कभी वो विचार इतना स्ट्रोंग बन जाता है, कि वोही विचार पुरे वातवरण में घूमता रहता है… सबके मन में वोही विचार रहता है, मान ले किसी ने आज किसी महिला का रेप कर दिया… अब वो चैन रिएक्शन के रूप में वाइब्स फ़ैल जाती है… जो सूक्ष्म रूप में सब के मन को इफ़ेक्ट करती है…

इससे वो एक विचार सबका विचार बन जाता है, उस विचार की फिर हर मन में कड़ियाँ बननी शुरू हो जाती है. उन कड़ीयों से फिर वो विचार अनेक अनेक रूप लेकर वातावरण में रहता है… जब तक सबका मन शांत न हो जाये.. ये चैन रिएक्शन का रूप है…

ऐसे ही जब हम अटेच रहते है, और हमारा मन एक विचार को उत्पन करता है. तो उसका रिएक्शन बहुत तीव्र गति से होता है. अर्थात जैसे हमारे मन में किसी के प्रति कोई नकरात्मक विचार चल रहे है, जिनके बारे में हम वो सोच रहे है. वंहा तक वो उर्जा जा रही है, जिससे उनका मन भी चलना शुरू हो जाता है… उनके मन से वोही विचार उत्पन होता है. परन्तु वो उस विचार को अपने हिसाब से सोचेगे… अर्थात जो उनका स्वभाव है, उस अनुसार वो उस विचार को लेंगे…

उदारण के लिए, आप किसी व्यक्ति के बारे में सोच रहे है. वो व्यक्ति बहुत खराब है, उसने मेरे साथ ऐसा किया. अब वो विचार उन तक जाता है. पूरा विचार नही, बल्कि एक वाइब्स उन तक पहुच जाती है. और वो अनजाने में आपके बारे में वैसा ही सोचना आरम्भ कर देते है. यदि वो अवेयर नही है, तो उनकी सोच आपकी सोच के अनुसार उनके स्वभाव के अनुसार आपकी सोच के प्रति प्रतिक्रिया होगी…

अब वंहा से उनकी उर्जा आती है, और हम उनके प्रति और नकरात्मक सोचना शुरू कर देते. जिससे मन चलता रहता है… मन में विचार उत्पन होते जाते है, यदि हमारा किसी के लिए कनफ्लिक्ट है, तो हम शांत नही रह सकते. वंहा विचारो का आदान प्रदान जारी रहता है. अब इससे बचने के लिए क्या करे..

मन को शांत करे/

मन को शांत करना एक लम्भी प्रक्रिया है… यदि आपका मन कई कई लोगो के साथ कनफ्लिक्ट में है. तो आप शांत रहने के लिए काफी संगर्ष करते होगे. यदि आपका व्यवहार सभी के प्रति अच्छा है, तो शायद आपको ये ज्ञान सुनने में कोई इंटरेस्ट भी  नही होगा. यंहा व्यवहार बाहरी नही, भीतरी बेहद जरूरी है. बाहरी व्यवहार से हम केवल कुछ समय के लिए ढोंग वाली स्थिति तो उत्पन कर देते. यदि अंदर में छल है. तो शायद हम सच्चा जीवन कभी जी नही सकेगे…

सच्चा शांति प्राप्त करना हमारे अपने हाथ में होता है, क्योंकि शांति हमारा स्वधर्म है… जो सबका जन्मसिद्ध अधिकार होता है. परन्तु निर्बल को शांति कन्हा/? निर्बल बाहरी रूप से नही आन्तरिक रूप से, बाहरी रूप से तो हम बेहद शक्ति सम्पन हो सकते, परन्तु मन में यदि शक्ति नही, तो हम निर्बल है… यंहा हम थोड़े कड़े शब्दों का प्रयोग कर रहे. इसके लिए माफ़ी चाहेगे, परन्तु यही सत्य है…

इसमें सबसे पहले हमे वो सब कनफ्लिक्ट देखने है, जिनसे हमारा संगर्ष चला है. इस को एक प्रोजेक्ट की तरह ले, १५ डेज प्रोजेक्ट सही रहेगा… और वो सारे कनफ्लिक्ट को अपने सामने एमर्ज करे. जिनके साथ आपकी बनती नही है. और बस आपको कुछ नही करना, अपने इस रिश्ते की उर्जा को परिवर्तन करना है…

मान ले कोई व्यक्ति आपके लिए खराब सोच रहा है , अब आप क्या करेगे? आप भी उसके लिए ऐसा ही सोचना आरम्भ कर देते है… परन्तु हम कर्म के सिधांत को याद रखना चाइये… कर्म का सिन्धात अर्थात, इस विश्व में कोई भी चीज़ का रिएक्शन तब तक नही हो सकता, जब तक हम कर्म न करे.. अर्थात वो गलत सोच रहा है, तो मतलब हमने कभी गलत सोचा होगा…

अब वो बात हुई, अब करना ये है. उनके लिए सही विचार करने है. हालंकि ये काफी मुश्किल होता है. खासकर उनके लिए जिनसे हमारे बेहद खराब रिश्ते है… हम समज सकते है. परन्तु सब ठीक करना है न? तो ये करना बेहद आवश्यक है… परिवर्तन ही लक्ष्य है… तो उस रिश्ते की उर्जा को सकरात्मक रूप देना ही सच्चा सच्चा परिवर्तन है.

इससे दुया भी मिलेगी और ये दवा का कार्य भी करती है… दुया उनकी भी, और दवा इसीलिए जब हम उन्हें अच्छा विचार देते है. तो इससे हमारी अपनी हीलिंग हो जाती है. हमरा मन शांत होने लगता है… उन्हें अच्छा कहने से वो तो अच्छे बने न बने , लेकिन आपका मन अवश्य ही अच्छा होगा. साथ ही एक सकरात्मक कर्म से हमारी आंतरिक स्तिथि अच्छी बन जाती है.

इससे अनेक फायदे है. अब वो रिश्ता भी सुधर जाता, हमारा कर्म भी अच्छा बन जाता, मन शांत हो जाता. तन स्वस्थ हो जाता. और मन की कडवाहट ठीक हो जाती है.. ये बेहद अच्छी बात है न?

क्योंकि जब तक हम भीतरी रूप से अपने मन के रूट को ठीक नही करेगे, तब तक मन में नकरात्मक विचार आने ही है… इसके अलावा यदि हम ऐसे प्रोफेशनल में है, जन्हा हमरे निचे बहुत सारे लोग कार्य करते है. तो जो जो हमारे बारे में चिन्तन करते है. उनका चिन्तन हम तक आता है, तो उनके बीच अपना चरित्र अच्छा बनाये रखने से उनकी अच्छी वाइब्स भी प्राप्त होती है…

अन्यथा कुछ लोग अपने से निचे वालो के प्रति गुस्से में आक्रोश में बात करते है. जिससे उनकी नकरात्मक वाइब्स हम तक आती है, जो फिर हमे और नकरात्मक बनाती है. अगली बार हम उन पर और अधिक गुस्सा करने का मन करता है. बस हमे वो परिवर्तन कर उनके प्रति सही भावना का विकास करना है. पहले तो उन्हें लगेगा, इनको क्या हुआ, पागल हो गये क्या? लेकिन धीरे धीरे उनकी नजरो में आपकी इज्जत बहुत अधिक हो जाएगी…

बस उन्हें सही से समजना है, और उन्हें प्रेम से देखना बात करना होता है… इसके लिए कुछ योग अभ्यास आदि भी हमे सीखना चाइये… राजयोग एक बेहद अच्छी तकनीक है. जो मन को सुंदर बनाने का एक नयाब तोहफा है.. इससे हम मन की आन्तरिक शक्ति को पुन चार्ज कर सकते है… bhrmakumari द्वारा ये सेवा निशुक्ल सिखाई जाती है… तो हमे ये मेडिटेशन अवश्य सीखना चाइये…

दोस्तों हम जीवन में अनेकानेक बाते से घिरे होते है, एसी एसी बाते जो जीवन में हमे उपर निचे लेकर आती है. हम कभी कार्य के लिए परेशान होते. कभी किसी के व्यवहार के कारण. इस सीरिज में हम मन की हर गतिविधि पर आपको रुबुरु करवाते रहेगे. और आपको बेहतर से बेहतर जानकारी प्रदान करते रहेगे…

आपका बेहद धन्यवाद… ॐ शांति…

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