what is the purpose of life?

जीवन का उदेश्य क्या होना चाहिए? ये सवाल हमारे मन में कभी न कभी अवश्य ही आते होगे. परन्तु हम तय कर नही पाते हमारे जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए. कहते है, उदेश्य ही जीवन है. उदेश्य नही तो जीवन जैसे निरथक बन जाता है. उदेश्य से ही हम जीवन की कहानी को लिखने का हौसला प्राप्त करते है.

जीवन का लक्ष्य

अब सोचने की बात ये है, कि हम ऐसे क्या लक्ष्य तय करे कि जीवन ही बन जाये? इसका सीधा सा सवाल है. हमारे जीवन का कोई बड़ा उदेश्य है ही नही, हमारे जीवन का रियल परपज है, खुश रहना और सभी के साथ एक तालमेल पूर्ण जीवन को व्यतीत करने का सामर्थ्य अपने भीतर जगाए रखना.

इसी छोटे लक्ष्य में समस्त लक्ष्य समाहित होते जाते है. इसी एक लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सारे छोटे मोटे लक्ष्य को अर्जित किया जा सकता है. परन्तु हम क्या करते है. इस पर थोडा प्रकाश डालते है.

अक्सर अधिकतर लोग अपने लक्ष्य में कोई निजी स्वार्ध पूर्ण चीजों का निधारण कर लेते है. जो उनके लिए बिलकुल भी राईट नही होता है. क्योंकि जब हम एक ऐसा लक्ष्य निर्मित करते है. जो हमारे लिए तो अच्छा है. परन्तु उसमे केवल स्वार्ध ही छुपा है. वो लक्ष्य दुसरो के लिए जरुर हानि ही पहुचाने वाला होता है.

इसमें लोग इर्ष्या आदि भावना हमारे प्रति रखते है. जिससे वो लक्ष्य तो सिद्ध हो जाता है. परन्तु जीवन के असली लक्ष्य से हम दूर हट जाते है. हम दुसरो को नीचा गिराने की भावना से भरकर लक्ष्य की पूर्ति हेतु अनेक गलत कदम उठाने के निमित बन जाते है. इसका परिणाम हमे दुःख के रूप में निकटम भविष्य में भुगतना पढ़ता है.

परन्तु यदि हमारा लक्ष्य बेहतर और सुधारक रूप में मन को एकाग्र किये हुए. सर्व सुख, सर्व हिताय के साथ चलता है. तो वो लक्ष्य स्वार्ध पूर्ण लक्ष्य से कई अधिक हमे पाप्त करवाता है. उस लक्ष्य की पूर्ति हेतु हम कोई गलत कार्य में तत्पर नही रहते है. और समाजिक रूप में कार्य करके सबके लिए सोचकर हम जीवन में उच्च पद तक भी प्राप्त कर सकते है.

उस लक्ष्य का असली परपज दुसरो के लिए फायदा समाया हुए रहता है. हमे वैसा लक्ष्य निधारण करना चाहिए, जिसमे अपने फायदे से पूर्व दुसरो के फायदे की बात हो. परन्तु यदि दुसरो का फायदा न भी हो, तो अपने फायदे हेतु हम ऐसा कोई लक्ष्य न बनाये जो हमारे लिए राईट नही है. अर्थात हम ऐसा लक्ष्य न बनाये जिसको पूरा करने में हमे काफी अधिक परिस्थितियों का सामना करना पड़े. जीवन में सत्य का मार्ग कठिन अवश्य लगता है. परन्तु वो मार्ग ही सच्चा मार्ग होता है.

असत्य का मार्ग हमे आसान और अच्छा दीखता अवश्य है. लेकिन उसमे कांटे ही कांटे है. अर्थात दुःख ही दुःख. हमे लक्ष्य निधारण से पहले जीवन की वो सारी यात्रा का विश्लेषण करना आवश्यक रहता है. जो हम अभी तक करते आये है.. इसको पॉइंट के रूप में लक्ष्य को निधारण करने की सारी बाते हम बता रहे है.

  • लक्ष्य को जब भी तय करे, उससे पहले पूर्व विश्लेषण अवश्य ही कर लेना चाहिए.. इससे होता ये है, कि हम पूर्व की गलतियों से सबक ले आगे के लक्ष्य को अच्छे से निधारित कर पाते है.
  • कोई भी लक्ष्य तय करने से पूर्व हमे परखने की विधि से उस लक्ष्य की प्राप्ति का परिणाम अवश्य देख लेना चाहिए…
  • लक्ष्य को निधारित करने से पूर्व लक्ष्य को अच्छे से समजने की जरूरत होती है. परन्तु उसमे परपज सदा समाहित होना चाहिए. और जीवन का असली परपज है. खुश रहना, और सभी के साथ एक तालमेल पूर्ण जीवन व्यतीत करना.
  • जब भी हम एक लक्ष्य का निर्माण करते है. उस लक्ष्य के पीछे के भाव बहुत जरूरी है. क्योंकि भाव से उर्जा निर्मित होती है. जिस भाव से हम कार्य करते है. उसी भाव से हमे मदद मिलती है. अच्छा भाव होना परम आवश्यक है. अन्यथा लक्ष्य में खामी ही नजर आती रहेगी.
  • जब लक्ष्य निर्मित हो जाये, तब उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सदा आराम से रूककर कदमरखनेचाहिए. यंहा कदम मतलब उस लक्ष्य के लिए बेहद सावधानी से संकल्प लेना परम आवश्यक है. क्योंकि एक एक संकल्प उस लक्ष्य तक हमे पहुचाता है.
  • लक्ष्य में तेरा मेरा आदि भाव से मुक्त रहना चाहिए. ये लक्ष्य प्राप्ति हेतु सबसे बड़ा कांटा बन जाता है. एक महान लक्ष्य इन सभी भाव से परे होता है. और जो लक्ष्य के बीच इन भाव के रूप में व्यक्ति आते है. उन्हें सहन करना ही सच्ची सफलता बनती है.
  • लक्ष्य का निधारण सदा भी अपनी आत्मिक स्थिति में करना चाहिए. क्योंकि उससे एक आत्मविश्वास आयेगा. दूसरा स्वार्ध नही होगा. तीसरा लक्ष्य को बल प्राप्त होता है. जिससे हम सहयोग के पात्र बन जाते है.

ये कुछ बाते जो हमे लक्ष्य से पूर्व अम्ल में लाने की परम आवश्यकता होती है. इन बातो के बल से हम अपने लक्ष्य को काफी बेहतर रूप में तैयार कर सकते है. लक्ष्य आवश्यक रहता है. पर जैसे की हम पहले ही बता चुके है. जीवन का असली लक्ष्य खुश रहना और सभी के साथ एक तालमेल पूर्ण जीवन है. इसमें हम सभी को एक समान रूप में देखकर बिना भेदभाव सभी से समान व्यवहार करते है.

क्योंकि इसके पीछे बहुत गहरा रहस्य है. जब हम खुश रहकर सभी के साथ एक समान व्यवहार करते है. तो सभी से हमे एक बेहतरीन उर्जा प्राप्त होती है. जो हमारे निजी लक्ष्य को प्रभावित नही करती है. इसीलिए यंहा लक्ष्य को ऐसा रखना बेहद आवश्यक होता है. जिसमे कोई निजी स्वार्ध न हो. वोही लक्ष्य सभी के लिए अच्छा होता है. उस लक्ष्य में हम दुसरो के हित को ध्यान में रखकर चलते है.

जिससे दुसरो से ब्लेसिंग मिलती रहती है. जो ब्लेसिंग हमे आने वाले समय में मदद करती है. वो मदद बुरे समय में हमे अनिश्चित रूप से कंही न कंही से मदद का डिपोसिट होता है. ये बहुत ही लाभदायक और सुविधाजनक योग हमारे निजी जीवन में बना लेते है. जिससे जीवन काफी अच्छा बनता जाता है.

दोस्तों इसके लिए हमे रोजाना अपने जीवन की यात्रा को देखने की आवश्यकता है. और टेंशन की जगह अपने ऊपर सदा के लिए अटेंशन रखने की आवश्यकता है. क्या है न, मन बुद्धि एक जगह टिकती नही है. इसे एक जगह टिकाने का तरीका है, इस पर पूरा दिन अटेंशन रखना. धीरे धीरे मन. बुद्धि हमारे अनुसार एक बात पर टिक जाएगी.

कुछ व्यक्ति क्या करते है? एक लक्ष्य बनाते है, परन्तु मन बुद्धि के भटकाव के कारण वो लक्ष्य पर स्थिर रह नही पाते. परिणाम स्वरूप लक्ष्य को परिवर्तन करते रहते है. यदि स्थिर बुद्धि होगी तब ही लक्ष्य को पाया जा सकता है. फिर एक साधारण लक्ष्य को भी काफी विशेष बनाया जा सकता है. परन्तु इसके लिए एकाग्रता बेहद आवश्यक है. वो केवल अटेंशन से ही प्राप्त की जा सकती है. अटेंशन एक अभ्यास है…

दोस्तों उम्मीद है, आपको जानकारी पंसद आई होगी. अपनी राय अवश्य लिखे. धनयवाद… आपका जीवन सदा खुशहाल रहे…

Leave a Reply