कभी कभी हमारे मन में बुरे बुरे संकल्प आते है. एसा क्यों होता है? ये विचार काफी देर तक रहते है. और मन में बुरा प्रभाव छोड़ देते है. इसके पीछे कई सारे कारण होते है. इन कारणों पर हमे विचार करना चाहिए. ये कारण बदलते दौर से लेकर खान पान, और पूर्व जन्म की घटनाओ पर भी आधारित होते है.

मन के संकल्प…

मान ले अभी हमने एक संकल्प लिया, हमे वो कार्य करना है. परन्तु हम उस संकल्प को पूर्ण करने से पूर्व ही छोड़ देते है. और एक दूसरा संकल्प ले लेते है. उस संकल्प के साथ भी वोही करते है. अब जब हम शाम को अपने साथ बैठते है. हमे उस समय वो मज़ा नही आता जो आना चाहिए था. कारण हमने जो संकल्प लिए उसको पूर्ण नही किआ. इसकी वजह से मन में व्यर्थ चलना आरम्भ हो जाता है… इससे सेल्फ दोउट सबसे पहले उबरता है…

जब हम वोही कार्य पूरी लग्न से अपने साथ ईमानदारी पूर्वक करते है, तब ऐसा नही होता है. आपको ये अवश्य ही नोटिस करना चाहिए. क्योंकि जब हम अवेयर रूप में होते है. और कार्य को दृढ़ता से करते है. उस वक्त हमारा सारा ध्यान केवल अपने उस संकल्प को पूर्ण करने पर ही होता है. जो हमे ख़ुशी का अहसास दिलाता है.

पूर्व जन्म

कभी कभी ऐसा भी होता है. हमारे मन में ऐसे विचार आना आरम्भ हो जाते है. जो विचार का कोई निजी महत्व होता नही था. अर्थात जिन विचारो की कोई इदर उदर तक कोई पकड़ ही नही है. वो विचार हमारे मन में आना आरम्भ हो जाते है. हम सोचते है, ये क्यों आ रहे है? पर उसका कोई कारण हमे मिलता नही है.

इसके पीछे का कारण हमारे पूर्व जन्म के कर्म और विकारो के वश किये गये कर्म ही होते है. जो थोड़ी सी स्मृति कारण उन विचारो की उत्पति का कारण बन जाता है. ये विचार हमारे ही पिछले जन्म में किये गये कर्मो का नतीजा होता है. इससे बचने के लिए जिस तरह के वो विचार आ रहे है. अभी हमे उसके लिए सही कर्म करने की आवश्यकता होती है…

हम उस कर्म को नही बदल सकते. लेकिन वर्तमान को हम बदल कर जीवन को अच्छा बना सकते है. पूर्व जन्म के कर्म तो हो गये. लेकिन इस जन्म के कर्म to हमारे हाथ में है. हमे उस वक्त शांत रहकर इस समय सही कर्म करने की आवश्यकता होती है.

गलत साथ

यदि हम गलत लोगो के साथ है. गलत व्यवहार में जीवन जी रहे है. तब हमारे विचार उनका ओसत ही होगा. जैसे लोगो के साथ हम रहते है. वैसा हमारे विचारो पर उनका प्रभाव पढ़ता है. तब जब हमारी स्थिति शक्तिशाली न हो. ऐसें में हम गलत तरह के विचारो के साथ जी रहे होते है. क्योंकि उनकी vibe हम पर असर डालती है. जिसका असर हमारे विचार पर पढ़ता है.

इस बात का हमे बहुत ख्याल रखना चाहिए हम कैसे साथ में रहते है? अच्छा संग है, to अच्छा रंग है. संग अच्छा नही to रंग भी अच्छा नही. जीवन इस पर काफी निर्भर करता है. to हमे अपने संग का विशेष ध्यान रखने की आवश्यता होती है.

खान पान

खान पान का भी मन से काफी गहरा रिश्ता है. कहते है, “जैसा अन्न वैसा मन” अर्थात जैसा हमारा खान पान होगा, उसका असर मन पर आएगा ही. यदि हम बाहर का खाना खा रहे है, कुछ ऐसा भोजन कर रहे है. जो पैसे के लिए बनाया है. to उसमे पैसे कमाने की vibes है. जिससे हमारे मन में वो vibe आ जाती है.

यदि हम सही भोजन करते है. अर्थात शुद्ध शाकाहारी घर पर बना हुआ. साथ ही भोजन बनाते वक्त विशेष अपने विचारो का विशेष ध्यान रखते है. और आनन्द पूर्वक भोजन बनाते है. to वो भोजन अमृत सम्मान हो जाता है. साथ ही भोजन खाने से पहले इश्वर को जरुर अर्पित करना चाहिए. इससे दिल शुद्ध हो जाता है.

इसके अलावा बुरे संकल्प का सीधा सम्बन्ध हमारी सोच और वृति के उपर भी होता है. यदि हमारी वृति में बुरी आदते है. बाहरी लोगो का प्रभाव है. तब हमारे संकल्प थोड़े आगे पीछे अवश्य ही होगे. इसकी हमे सम्भाल करनी है.

अच्छा ॐ शांति…

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