क्या आपको ;लगता है, देवी देवता का धर्म हिन्दू था? देवी देवता का धर्म आदि सनातन देवी देवता धर्म था. हिन्दू धर्म कभी था ही नही! ये बाद में जब दो युग के बाद द्वपार की शुरुवात हुई, तब जाकर हिन्दू धर्म का उथान हुआ.वास्तव में हिन्दू नाम कन्हा से निकला ये हमे नही मालूम.

परन्तु असल में जो आदि धर्म भारत वालो का था. वो आदि सनातनी धर्म है. और आपका सवाल है, ३३ करोड़ देवी देवता. तो हाँ आदि सनातन धर्म में ३३ करोड़ जनसंख्या थी. उन सभी को देवी देवता कहते है. जैसे आज सभी को मनुष्य कहते है. थे वो भी मनुष्य ही, परन्तु उनमे देवीय गुण होते थे. ये ३३ करोड़ दो युगों की जनसंख्या है.

परन्तु इसमें सब राजा प्रजा, दास आदि आ जाते है. अब सभी को तो पूजा नही जाता न? पूजन तो केवल उनका होता है, जो राजा रानी होते है. प्रजा को थोड़ी पूजा जाता है. लक्ष्मी नारायण का राज्य था. तो क्या सब राजा ही होगे? प्रजा भी तो होती है.

इनमे से १६१०८ मुख्य देवी देवता थे. जिनके मन्दिर आदि आज भी बनते है. बाकि ९ लाख आदि में प्रजा थी. कहेगे सभी को देवी देवता, क्योंकि वंहा धर्म ही देवी देवता धर्म है. तो जो दास भी होगा वो भी देवता ही कहलाता है. क्योंकि जैसा राजा वैसी प्रजा होती है.

बाकी जो लोगो ने अलग अलग प्रकार से इस बात को समजा है. वो अपने दृष्टीकोण के लिए एकदम राईट है. अब उनकी भी अपनी मत है. परन्तु इसमें ज्यादा सोचने की तो बात है नही! बस राजा रानी और प्रजा.

अब जैसे हम हनुमान को देखते है, एक हनुमान जो बन्दर था. केवल उसी को क्यों पूजा जाता है. सारी बन्दर सेना को क्यों नही पूजते है? वैसे ही देवी देवता जो मुख्य होते है.. केवल उन्ही के मंदिर आदि होते है. परन्तु ऐसा नही गायन केवल उन्ही का होगा. गायन तो पुरे ३३ करोड़ देवी देवता का होता है.

वंहा का दास भी आज के किसी बड़े धनवान से कई अधिक धनी होता है. क्योंकि वंहा अखूट खजाना अखूट धन होता है. वंहा की प्रजा भी बहुत धनवान होती है. परन्तु वंहा पर भी कोई ज्यादा अमीर कोई कम अमीर वाला सिस्टम होता है. किसी के पास सोने का बड़ा महल किसी के पास छोटा महल होता है…

वंहा सब कुछ सोने का होता है, इसीलिए सोने का युग है… आज सब लोहे का है, तो लोहे का युग हुआ. समय के साथ साथ परिवर्तन होता है. तो हर चीज़ बदल जाती है… यंहा तक कि हमारे शरीर में भी लोहे का प्रभाव पड़ता है. वंहा पर हर चीज़ ओरिजिनल होती थी. जैसे खूबसूरती ओरिजिनल, परन्तु यंहा पर सब डुप्लीकेट अर्तिफिश्यल.

क्योंकि सोना तो सोना होता है. परन्तु लोहे में तो जंक लगता है. इसीलिए उसे मेकअप आदि से चमकाना पढ़ता है. वैसे ही सिल्वर युग में सब सिल्वर का होता था. और कांस्य युग में सब कांस्य का होता था. परन्तु सिल्वर और कांस्य भी असली नही, असल में तो स्वर्णिम युग ही असली स्वर्ग है…

देवी देवता और मनुष्य में क्या भिन्नता है?

देवी देवता और मनुष्य में काफी सारी समानता भी है. और जमीन आसमान का फर्क भी. परन्तु असल में देवी देवता भी मनुष्य ही थे. अर्थात शरीर उनका भी हमारी ही तरह रहता था. परन्तु उनके गुण और दिव्य शक्ति हमसे कई ज्यादा अलग थी.

  • देवता सोमरस पीते थे, और मनुष्य शराब पीते है.
  • देवी देवता दिव्य गुणों से १६ कला सम्पूर्ण पवित्र थे, यंहा हम देख ही सकते है.
  • देवी देवता की उम्र १५० वर्ष होती थी. आज मनुष्य की ओसत आयु ७० साल है.
  • देवी देवता सर्वगुण के मालिक थे. मनुष्य अवगुण के मालिक बन गये.

वैसे हर स्थान,काल, देश के हिसाब से तुलना करना अभी के समय हमे नही लगता व्यवहारिक हो सकता है. ये बाते हमने इसीलिए ही यंहा लिखी है. हम सब अपने अराध्य को पूजते रहते है. क्यों नही हम उनके एक दो गुण को जीवन में लाकर उनके सम्मान बनने का यत्न करे?

वैसे अलग अलग प्रकार की भ्रांतियां अभी भी बनी हुई है . देवी देवता कौन थे? वो कैसे दीखते थे.? उनके कितने हाथ थे? आदि आदि अनेक चित्र को देख हम उनके अलंकार स्वरूप को ही असली मान बैठते है. परन्तु कभी ये सवाल ही नही करते आखिर चार हाथ वाले कोई कैसे हो सकते है.?

परन्तु जैसे हम कोई नाटक को भी देखते है. तो हमे लगता है, ये रियल है. परन्तु असल में उसमे सबकुछ एक एक्ट और नकली चीज़े क्रिएट की होती है. वैसे ही भगवान में आस्था बिठाने के लिए भक्ति में ये सब चित्र आदि बने. यदि मनुष्य रूप का ही चित्र दिखाते तो आस्था बैठती नही. इसीलिए इतने बड़ा कर देवी देवता को दिखा दिया है…

हाँ उनका स्वरूप दिव्य था. लेकिन चार हाथ, आदि ये सब अलंकारिक रूप है. जिसका अध्यात्मिक रहस्य है. बाकि सोने के आभूषण में सजी कोई देवी वो सब सत्य है. क्योंकि देवी देवता का स्रीग्नार कोई आज के तरह थोड़ी होता था, उनका तो श्रीघार भी दिव्य होता होगा. ऐसा कि आज के वक्त यदि कोई देवी यंहा आ जाये. तो पूरी दुनिया की सारी खूबसूरती फीकी पड़ जाएगी.

खुद सोच कर देखिये. एक स्वर्णिम युग की देवी कितनी खुबसुरत होगी? क्या उनकी तुलना आज लोह युग की खुबसुरत लडकी से की जा सकती है.? नही! हालंकि आज के वक्त भी बहुत खूबसूरती हमे देखने को मिलती है. जो अच्छी बात है.

इसके आलावा देवी देवता की महिमा में हमे कई वैद मिल जाते है. एक वैद तो उनकी स्तुति में ही लिखा गया है. सब कुछ का बहुत गहरा रहस्य है. जो हमे समजने की आवश्यकता है.

अच्छा ॐ शांति…

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