the things that we know never hurt again? what hurt us? how to avoid hurt? how to overcome our hurt? how to manage our hurt?

कहते है, दुःख सुख इन्सान दुःख एवं सुख की जीवन ही जीता है. एक तरफ सुख, तो दुःख भी है. तो क्या ऐसा नही हो सकता, हमे सदा सुखी रहे? हाँ ये सम्भव तो है. ऐसे इन्सान है, जो सदा खुश है. परन्तु वो घर छोड़ जाते है. अब हमे तो घर नही छोड़ना है. फिर भी खुश रहना है. तो यंहा कुछ पॉइंट है. जिनपर हमे ध्यान देना चाहिए.

how to avoid hurt?
  • सुबह जल्दी उठने से काफी चीज़े हल हो जाती है. सुबह उठकर एकांत में बिलकुल मौन में जाए, और जो भी दुःख है. उसके लिए खुद से प्रशन पूछे, में अपने दुखो को कैसे खत्म करू? तो मन जवाब देगा.
  • देखिये राजयोग जीवन जीने का एक अभूतपूर्व तरीका है. राजयोग क्या है? इसके बारे में विडिओ आदि में देख सकते है.
  • दुःख आने के कारण का पता लगाने के लिए साइलेंस बहुत मददगार है. साइलेंस पॉवर जितनी अधिक हम बढ़ाते जायेगे. उतना अधिक हम स्वयं को खुश रख सकते है.
  • आलस्य दुःख का एक बड़ा कारण है, हमे इस आलस्य को त्याग करना ही सर्वप्रथम दुःख से मुक्ति है. स्वयं को योग, आदि आदते डालना. ताकि आने वाले समय में हमे वो परेशानी न हो. जिससे हमे होस्पिटल आदि जाना पड़े. तो समय से पहले ही हमे योग आदि से अपनी थोड़ी सम्भाल कर लेनी चाहिए…
  • सोच को बेहतर बनाने के लिए हमे काफी मेहनत की आवश्यकता है. सोच बेहतर बनती है, अच्छी चिन्तन से, तो चिन्तन जितना अच्छा. उतना सोच बेहतर बनते जाएगी. जैसे चितंन हमे करना चाहिए. “में खुश कैसे रहूँ” में ये काम कैसे कर सकता हूँ, में अपनी उन्नति कैसे कर सकता हूँ. अच्छे अच्छे चितंन के टोपिक लेकर फिर उनके उपर चिन्तन करना. ये मन को सही भोजन देना है. फिर हमारे एक्शन भी वैसे ही होते जाते है…
  • सदा जीवन को सुखी बनाने के बारे में सोचना चाहिए. जैसा हम सोचेगे फिर वैसा वैसा होने लगता है. ये नही सोचना चाहिए. दुःख है, चिंता है. नही इनके बारे में सोचे ही नही. जो चाहिए उसके बारे में सोचना चाहिए. उससे ,मन एक बेहतर इमेज बनाता है. और जैसे जैसे हम वो चिंत्तन में लाते है, तो उस इमेज से स्मृति बनती है. फिर स्मृति एक्शन में आ जाती है. और हमारे कर्म उसी अच्कोर्डिंग होते है. तो हमे इस बारे में सबसे ज्यादा ध्यान की जरूरत होती है…
  • आदते जीवन बनाती है… हमारी आदते कैसी है? इस पर विशेष ध्यान की आवश्यकता है. आदतों के बल से हम काफी अधिक ग्रहण कर सकते है. आदते जीवन में परिवर्तन को नया आयाम प्रदान करती है. आदते यदि अच्छी है, तो स्वयं को महत्वशाली हम समज सकते है. आदतों में बदलाव एक दिशा देता है. जो बेहतर रूप से हमे नई उर्जा प्रदान करने के निमित बनता है. हम नये सिरे से नई आदतों के साथ सामजस्य बिठा कर, बेहतर रूप को प्राप्त होते है. वो रूप नव निर्माण अर्थात नई सरचना होती है. जो पुराने से नई की तरफ नई बाते लेकर आती है. जैसे उदारण के लिए सांप अपनी पुरानी खाल छोड़ता, वैसे यदि हम आदते रूपी पुरानी खाल छोड़ते, तो नई खाल हमे नई ऊँचाई देती.

दुःख का भावी और सुख का भावी दोनों से उंच संतुष्ट रहने में भावी है. भावी अर्थात भाव में स्थित दोनों भावो से ऊँचा संतुष्ट भाव में स्थित. तो सुख दुःख एक सम्मान है..
ये कुछ बाते जीवन में काफी चीजों को बेहतर करती है. हमे नये सिरे से सोचने का तरीका प्रदान करती है. हम नई उर्जा से भर जाते है. ये नई उर्जा नये विकास के मार्ग खोल देती. जिस कारण हम काफी उन्नत्ति को प्राप्त होते है. ये उन्नति हमारे साथ साथ समस्त के विकास में भी मील का पथर बन जाती. ये पथर विकास की नई ऊँचाई को छूनेवाली स्थिति पैदा करने वाली यात्रा दिखाती

इस यात्रा में हम दुःख से अलग सुख के विश्व में होते है. उस सुखमय संसार में हम बस खोना चाहते है. ये संसार हमे अनेक दुखो से न्यारा कर लेता है. इस संसार में परमात्मा के साथ का अनुभव हम बेहतर रूप में कर पाते. जो काल्पनिक न होकर हमारे दुखो को हीलिंग में डालने वाला, बेहतर प्रकार बन जाता.

हमे उस प्रकार अपनी अंदर की शांति को खोजने पर पूर्ण बल देने की परम आवश्यकता है. राजयोग इसमें मदद अवश्य करता है. धन्यवाद.

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