why we feel good and bad,.. why we feel low.? what is the cause of our unhappiness?

आप सोच रहे होगे, ये क्या सवाल है. मनुष्य है, तो सुख दुःख तो होगा. परन्तु हम इसको और डीप लेवल तक समजने की आवश्यकता है. सुख क्या है? सुख हमे कब भासता है, सुख में हम क्या करते है? जैसे दुःख में हमे बेहद लो फील होता है, वैसे सुख हमे अति ख़ुशी देने वाला होता है. इस समय हम बस खो जाना चाहते है… और जीवन का आनन्द लेना चाहते है.


परन्तु ये वक्त ज्यादा नही चलता. आप सभी को ही ये अनुभव होगा. क्यों ऐसा होता है? क्योंकि सुख-दुःख कभी स्थायी हो ही नही सकते. यंहा हम जो फील करते है, वो सारे सुख स्थायी नही है. वो सुख अस्थायी तौर पर बने हुए है. जैसे यदि हमे आज मोबाइल से सुख मिल रहा. तो जरुर कल हम बोरियत भी फील करेगे. फिर हमे क्या चाहिए. कुछ और कुछ और.

how to avoid bad things from life?

ऐसे ही हमारी यात्रा लगातार इसी सुख दुःख में घिरी है. रिश्तो में सुख, फिर कुछ हो गया. तो दुःख का अनुभव. परन्तु क्या हो जब ये सुख दुःख हो ही नही? क्या हम सच में सुख दुःख लेने यंहा आये है? हाँ हम यंहा सुख लेने ही आये है. इस धरती पर एन्जॉय करने आते है. परन्तु क्या होता हम जब यंहा पर किसी चीज़ से जुड़ जाते. तब हमे दुःख होता है.

ये बेहद क्लियर समजने की जरूरत है. दुःख क्यों होता? “जब हम किसी भी वस्तु, वैभव, व्यक्ति, परिस्थितियों, या स्थिति के साथ जुड़ जाते. तब हमे दुःख की अनुभूति एक न एक दिन करनी ही है” क्योंकि ये विश्व परिवर्तन शील है. ये कभी एक सम्मान नही रह सकता. अभी जो व्यक्ति आपको अति प्रिय है. कल वो प्रिय न रहे. तो क्या होगा?

वो वस्तु न रहे, तो क्या होगा? अब इस दुःख से बचने का तरीका क्या है? इससे बचने का तरीका भी बड़ा ही सिंपल है. अनासक्त होकर आनन्द लेना. अर्थात यंहा कुछ मेरा है नही. जब हम इस भाव से रहते है. तो दुःख सुख से न्यारे है ही. संतुस्ट भाव सदा सुख का भावी है. क्योंकि इसी से हम मन को मुदित करने की स्थिति में आते है.

जिससे एक तो वैर भाव से हमे निजात मिलती है. दूसरा हम अन्य के प्रति एक समपर्ण वाली सोच रख सकते है. जो सामने वाले के लिए भी शुभ हो, और हमारे लिए तो शुभ होनी ही है. संतुस्ट होना अर्थात शिकायतों से मुक्त हो जाना. अन्यथा हम हर जगह बस शिकयत लेकर ही पहुच जाते है. क्योंकी हमने सुख दुःख की परिभाषा ही गलत देकर रखी है.

सुख दुःख अर्थात, एक नाटक का हिस्सा. आप फिल्मे तो जरुर देखते होगे. उसमे सुख का दृश्य भी होता, तो अति दुःख का दृश्य भी होता है. परन्तु दोनों ही समय वो लोग जानते है. हम एक्टिंग कर रहे. जो रियल में इन बातो को समज गया. ये विश्व एक नाटक है. तो सुख दुःख से उपराम होकर नाटक को एन्जॉय करेगा. प्ले भी करेगा. और एक्टर बनकर अपना रोल निभाएगा. लेकिन उसमे फसेगा नही.

ये अपनी आत्मिक स्थिति शांत, और आनन्द की स्टेज है. जो सबको पसंद है. इसमें वैर भावना, नफरत. आदि से बच जाते. जब हम समज जाते, सामने वाला अपना पार्ट निभा रहा. और में अपना पार्ट निभा रहा. तो हम काफी चीजों से स्वयं को बचा सकते है. क्योंकी उस समय हमे ज्ञान होता, ये सब एक खेल मात्र है. तो खेल में कुछ बाते अच्छी होती, कुछ अच्छी नही होती. लेकिन कभी खेल से दुखी नही होते. एम्जोय करते है.

आपका पोस्ट पड़ने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया, आपका जीवन सदा सुख, शांति से भरपूर रहे. यही हमारी शुभभावना है. धन्यवाद…


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