how to make our life better?

life एक खेल है, अक्सर हम ये भूल जाते है… जब हमे ये मालूम है, की जीवन और कुछ नही बस एक खेल मात्र है. तो हम इस जीवन को बेहद शान से जी सकते है. क्योंकि खेल है, उसमे हार जीत तो नार्मल है. जब सब नार्मल है, तो हम क्या जीवन को अच्छा नही बना सकते? नार्मल की परिभाषा क्या है? नार्मल मतलब कुछ है ही नही.

एक नोरमल होता है, जो सबके लिए नार्मल है, एक होता है. जो हमारे लिए नार्मल है. हमे बस खुश रहना है. इसीलिए हमारी इस यात्रा में हमे सदा क्या करना है? खेल को बहार ही रखना है. और अपने भीतर के मन को सदा आनन्दित रखना. क्योंकि वो सब तो बहार है. बात आई, जो हुआ, सब बहार है. इसीलिए एक शब्द में उस बात को लिया, और समेट लिया. काफी आसान है…

एक शब्द क्या है? सब अच्छा है. यही जीवन को अच्छा बनाने का तरीका है. अच्छा अच्छा कहते जयो, तो अच्छा तो बनना ही है. फिर ये शिकयाते होती है. वो समाप्त हो जाएगी. और मन की चिंता भी कम होती जाएगी. बस हमे अच्छा अच्छा बोलना है. जैसे हमारे पास कोई बहुत बड़ी बात आ गयी. हम क्या करते है, एकदम से रियेक्ट कर देते है. इतनी बड़ी बात, लेकिन हमे क्या करना चाहिए था. उस बात को देखना, उससे थोडा अलग होना, फिर उस बात को क्लियर करके मन से चेक करना. की क्या सही किया जाए.

अलग होना बेहद जरूरी है. अब अलग कैसे होगे? जैसे सोचना ये मेरी प्रोब्लम है ही नही, ये तो अन्य की मुश्किल है. तब उससे अलग है. और फिर उसका हल शांति से निकाल देना. ये बहुत आसान है. इसको सहजता पूर्ण जीवन कहते, क्योंकी जब आप दुसरो के प्रोबलम को सोल्व करते तो क्या होता? आप एकदम से रिजल्ट निकाल देते.

लेकिन अपने में फस जाते, क्यों? क्योंकी मेरी बात है न? मेरे में मोह है. इसीलिए फस जाते है. अब फसना नही बल्कि निकलने का रास्ता है. उस बात को अपनी समजो ही नही…ये मेरा शब्द फसाने वाला है. इसी से कई कई लोग कई कई सालो तक एक ही मुश्किल में फसे हुए है… जब हए टूटे तब निकलना सम्भव है.

अब मान ले आप एक ऑफिस में कार्यरत है. उसमे आप हर दिन एक समस्या से जुजते है. आप उस समय क्या सोचते है? जरुर उनका हल निकलाते है. क्योंकी वंहा आपको लगता है, ये में दुसरो के लिए काम कर रहा. ये उनकी प्रोबलम है. ये प्रोबलम आपकी प्रोब्लम से कई अधिक बड़ी है. लेकिन हल निकाल देते है.

परन्तु अपने साथ क्या होता है? वंहा हम अटक जाते है. कारण हम प्रोबलम को समज नही पाते. जिस कारण हम उसमे फस जाते. मेरी है न, तो अटकना तो सहज लगता है. दुसरो की होती, तब हल निकालता.

यंहा से निकलना तो सहज है… परन्तु क्या और भी तरीके है, जो हम जीवन को अच्छा बना सकते है? वो है, हमारी थिंकिंग,… इससे हम काफी मुश्किलों को दूर कर सकते. मान ले हमारी सोच अभी बहुत खराब चल रही, १० मिनट हम अच्छा सोचे, फिर देखो कैसे हम बदल जाते. जितना अच्छा शब्दों का हम प्रयोग करेगे, फिर वो मन की स्थिति बन जाएगी.

क्योंकी टेंशन वास्तव में क्या है? मात्र शब्दों और स्मृति का खेल न, तो सहज है. थोड़े शब्द अच्छे किये. और टेंशन को बाये बाये किया. बड़ी से बड़ी मुश्किल हो, थोड़े शुभ भाव युक्त शब्द उन मुश्किलों को आसान बना देता है. हालंकि मुश्किल वैसी ही है. लेकिन हमारी सोच आधा काम कर देती. बाकि आधा काम खुद हो जाता.

मिरकल देखने है, तो बस सोच पर हमे बहुत काम करना है. तब मिरिकल होते हम देख सकते है. सोच हमे कुछ भी दिला सकती है. कैसी भी हालत क्यों न हो, यदि हा प्रभाव में न हो, अलग होकर हम अपनी सोच पर कार्य करे, तो उसका बहुत बड़ा इफ़ेक्ट जीवन में आता है. लेकिन बेहद आवश्यक है, हमे हमेशा इस बात का ध्यान रखना है. की कभी किसी के प्रभाव में ना आये. अन्यथा उनके अनुसार हमारी सोच चलेगी. जो फिर हमे स्वतन्त्र होने से रोकते है.

फिर आप अच्छा सोचो या सोचो, दोनों ही परिस्थिति के वशीभूत है. वंहा आप कुछ नही कर पायेगे. जैसे एक न्यूज़ देखने वाला इन्सान, सामने चल रही डिबेट में एक दो को गलियां देता नजर आता है. और कर कुछ पाता नही, वैसी हालत अपनी नही करनी. हम अपने दायरे में रहकर सोचे, और अच्छा सोचे, तो उसका इफेक्ट आता है.

आज के लिए इतना ही, आपका पोस्ट पढने के लिए बहुत बहुत आभार आपका जीवन अच्छा रहे…

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